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मुक़र्रर हैं जो.



मुक़र्रर हैं जो.

देखो मुस्कुरा रहा हैं. पता हैं ख़ुशी का वक़्त मुक़र्रर हैं। मोत के साथ।

मुक़र्रर तो हैं क्या में मुस्कुराऊँ भी नहीं।

क्या में हंसु भी नहीं। क्या में मिलु भी नहीं। अब में गले लागु भी नहीं ।

हा हां पता हैं एक दिन मुक़र्रर हैं.

हमसफ़र हैं दो पल का हसना। हमसफ़र हैं दो दिलो का मिलना।

जुदाई तो मुक़र्रर हैं. मुक़र्रर हैं दो पल की ज़िन्दगी दो पल में मौत.

writer

izhar alam dehelvi


Who are ready

Look you are smiling. You know that the time of happiness is clear. With the dead.

Are you ready to smile at all?

Am I not even cheerful? Can I not even meet? Now I don't even have a hug.

Yes, yes, I know one day is ready.

Humsafar (Companion) is a two-moment laugh. Humsafar (Companion) is the meeting of two hearts.

Separation is clear. There is a death in two moments of life.

writer

izhar alam dehelvi

writerdelhiwala.com

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