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एका -अधिकार , एका-अधिकार।

अपडेट करने की तारीख: 2 सित॰ 2020



 

मोनोपोली 

 एकाअधिकार, होगा अगर आपकी होल सेल की दूकान को एक बड़ी कंपनी धीरे धीरे कैप्चर कर ले। आप कहेंगे के ये कैसे हो सकता हैं मेरा व्यापार हैं मेरी मर्जी में तो नहीं बेचूंगा अपना काम धन्धा तो कैसे कैप्चर करेगा। सही कहा अपने आप कहा बेचेंगे आप तो अपने काम के मालिक हैं। आपको तो पता भी नहीं चलेगा कब आपका धन्धा मंदा हो गया। हम समझाते हैं आपको कैसे  व्यापार बेचना पड़ेगा।अगर कोई दूसरा काम धन्धा बचा होगा तो कर सकेंगे आप।  

तो यू समझिए के एक कोल्ड ड्रिंग  देश में नाम था कैम्पाकोला, था न? आप कहेंगे हां था. 90 के दशक में आती थी। लिम्का भी थी थम्सअप भी थी 7up भी थी और भी थी। पर पर सभी को कोकाकोला कंपनी ने भारत में आते ही एक-एक कर मोटा लालच दे कर या धमका कर खरीद लिया। एक-एक कर सभी सॉफ्ट ड्रिंक की कम्पनी कोकाकोला के सामने टिक न सही और वो बिकनी शुरू हो गई कोका कोला का मार्किट पर एकाअधिकार हो गया। अब मन-मान प्राइस वसूल कर सकता थी। न कोई कंम्पीटेटर बचा ही नहीं तो पुरे देश की मार्किट पर उसका अधिकार स्थापित हो गया। अगर कोई नया ड्रिंग्स आती  भी तो वो जल्दी बंद हो जाती या एक छोटे से इलाके में सिमट कर रह जाता उसका व्यापर। इस कंपनी के पास इतना रुपया पैसा हैं के इसके सामने अगर कोई खड़ा भी हो गया तो वो चंद महीनो में इसके हाथो बिक जाती हैं। इसे कहते हैं एकाअधिकार। 

अब बात हम आपकी करते हैं यानी छोटे व्यापारिओं  की जिनको लगता हैं उनको कोई नहीं छूने वाला हम तो छोटे व्यापारी लोग हैं हमसे किसी को क्या नुक्सान या फायदा होगा। यहाँ आप गलत हैं. आपको ऑनलाइन का जायका तो लगा ही होगा जिस जिसमें अमेज़ॉन ग्रोसरी,ग्रोसरी, जिओ मार्ट होल सैल और रिलायंस ऑनलाइन बिजनिस मिलता हैं।  ठीक आप का जवाब होगा इससे हमारे बिज़निस को क्या खतरा। खतरा अभी नहीं आगे जा कर होगा जिस तरह जिओ मार्ट रिलायंस आपको सही दाम पर सामन खरीद रहे। धीरे धीरे वो अपन छोटे छोटे होल सैल स्टोर खोलने वाला हैं जहा पब्लिक को कुछ सालो तक कम दामो पर सामान  उपलब्ध होगा।घटा उठा कर लोगो को अपने स्टोर की तरफ आकषिर्त करेगा फिर आपका होलसेल का काम धीरे धीरे काम/खत्म हो जायेगा। फिर बारी आएगी आम लोगो की जिनको अभी कोई सामन 100 का मिलता हैं वही उसको एका अधिकार होने पर १२०-150 तक में लेना होगा। सायद इससे भी उपर मिले। नुक्सान हमारा ही होगा।  

एक और उद्धरण आपको देता हूँ आपलोगो ने टेलिकॉम कोम्पनिओ को तो देखा हैं जिसका सिम फ़ोन आप लोग इस्तेमाल करते हैं। जी वही जिस तरह jio  कंपनी आई उसने आते ही सबसे सस्ते यहाँ तक कई महीनो तक फ्री में सिम और इंटरनेट चलाने को दिया सस्ते फ़ोन दिए। जब लोग उसके इसके आदि हो गए तो उसने एयरटेल, वोडा फोन, आईडिया जैसी कोम्पनिओ को पछाड़ दिया कुछ कंपनी तो दिवालिया हो गई क्यूँ की वो सस्ता ट्रेफिक नहीं बेच सकते थे।  तो उनको मजबूरन अपना सामान लपेट कर इंडिया को अलविदा कहना पड़ा। कुछ आपस में मर्ज़ हो गई या यू कहें के उन्होंने भी हार मान कर एक कदम पीछे खींच लिया।  बची जिओ को टक्कर देने वाली कंपनी एयरटेल यानी दो बड़ी कंपनीया।  जिनका टेलिकॉम सेक्टर में एक अधिकार हो गया। इसके सामने सरकारी कंपनी एम् टी न ल और बी स न ल दोनों दिवालिया सरकार की निकम्मे पैन की वझे से या जिओ जैसी कोम्पनिओ को फायदा पोहोचे  के लिए बर्बाद कर दी गई।  अब अगर कोई नई कंपनी आएगी तो उसको इनसे ज़्यदा रुपियाँ /पैसा लगाना पड़ेगा और इनसे कम रूपीओ का ट्रफिक पब्लिक को देना होगा जो अभी तो दिखाई नहीं देता। अब छोटी कंपनी तो जिओ खरीद लेगा उसका हो गया एकाधिकार। पिसी  इन सब में पब्लिक। फ्री का लालच ज्यादा पसंद हैं अब वो देंगे ज्यादा पैसे रिचार्ज करने के इंटरनेट एक्सेस करने के लिए। फिर कहैए उल्लू  कौन बना. हम जैसे लोग। 

अभी हाल ही में अमेरिका के कौंसिल ने वर्ल्ड के दिग्गज सीईओ को तालाब किया हुआ था सभी पर बाजार पर एकाधिकार का आरोप हैं। जैसे फेसबुक को लीजिये उसने अपने प्रतिध्वंदी को डरा धमका कर या लालच दे कर उसका प्लेटफॉर्म खरीद लिया एक एक कर सभी सोशल प्लेटफॉर्म को खरीद रहा हैं जैसे इंस्टाग्राम वट्सप आदि।  जिसको अमेरिका के सांसदों की ज्यूरी के सामने आकर बताना होगा के क्यूँ किया गया ऐसा। अगर वो फाल्टी साबित होते हैं तो उनपर अमेरिका कानून के मुताबिक केस चलेगा और सजा जो भी तये होगी वो होगी। पहले भी माइक्रोसॉफ्ट पर ऐसा ही एक जुर्माना लगाया गया था। मगर।

  मगर हमारे यहाँ ऐसा कुछ नहीं हमारे प्रधान सेवक ही देश के बड़े बिजनिसमैनो के सामने नतमस्तक हो जाते हैं उनसे मिलने वाले चंदे से वो अपना चुनाव लड़ते हैं। अपनी पार्टी को मजबूत करते हैं। यही कम्पनिया चुनाव होने पर अपनी पसंद की पार्टी को चुनाव जितने में पूरी मदद करते हैं इनके पैसे चुनाव की दिशा बदल देते  हैं तो इनके पेसो से जीती सरकार इनकी नहीं सुनेगी इनको बिजनिस नहीं देगी तो किस को देगी। इनका फायदा होगा तो नेता जी का भी होगा।  हर बड़ी कंपनी में किसी न किसी नेता का हिस्सा होता हैं चाहे सत्ता वाले हो या विपक्ष के हो।  बस फर्क हैं तो सत्ता पाश ज्यादा पेसेवला होता हैं। नए नए वयापार देश में इंटरड्यूज़ करता हैं. उसमें अपना हिस्सा बना लेता हैं। नेता को देश से कोई सरोकार नहीं बस उनकी पार्टी और वो। पब्लिक भाड़ में जाए। अब आप क्या कहेंगे। के अब हमारा  हमारा कुछ नहीं होगा हमारा तो आने वाले दिनों में नुक्सान ही होगा।  फायदा होगा तो उन बड़ी कोम्पनिओ का जिन के प्लेटफॉर्म पर हम अपना बिज़निस कर रहे। या नेता जी का। ऐसे बोहोत से बिजनिस गिना सकता हूँ जिनका कभी देश में नाम और रूतबा हुआ करता था मगर अब उनका नाम भी कोई नहीं जानता। 

करना क्या चाहिए !

मैं कोई इकोनॉमिस्ट नहीं। मैं सरकार नहीं। मैं वो हूँ जो ऑंखें खोल कर रखता है. आस पास क्या घटना घाट रही हैं। उसका ज्ञान रखना। आज हम सब को एकाधिकार के खिलाफ एक जुट होना पड़ेगा अपने अस्तितउ को बचा कर रखना होगा। अपना व्यापर अपने प्लेटफॉर्म पर बेचना होगा लालच न करके अपना एक जुट होकर इस एकाधिकार से लड़ना होगा एक हो जाओ अपना एक बड़ासा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना होगा एक जैसे वयापार को एक साथ आकर इनसे लड़ना होगा तभी हम लोग हरा सकते हैं। सरकार से एकाधिकार के खिलाफ सख्त कानून बनाने पर ज़ोर देना होगा सरकार को सवालो के कठघरे में खड़ा करना होगा और सरकार को जवाब देना होगा। ठोस निति बना कर छोटे मझोले वयापार को बचने के लिए कदम उठाने को मज़बूर करना होगा। वरना आपके व्यापर के लिए कोई जिओ जैसी कंपनी आकर सब कुछ अपने नाम कर जाएगी और हम देखते रह जायेंगे।  

ये लेख सन्देश हैं.  बस बताने को बोहोत कुछ हैं पर पड़ने का टाइम लोगो के पास कहा हैं। मैं एक लिंक लगा रहा हूँ। सायद आप लोग उस वीडियो को देख कर सही से समझ जाएँ। आसान तरीका हैं इस वीडियो में सायद उससे   समझ जाये। पर आप सरकार पर दबाओ डाले ताकि सरकार कोई नई निति बनाये, मोनोपोली के खिलाफ। 

लेखक 

 इज़हार आलम 

(writerdelhiwala)


ये वीडियो एक मशहूर न्यूज़ एंकर की हैं जो इकोनॉमिस्ट भी हैं कभी ये ndtv पर काम किया करते थे अब ये न्यूज़ क्लिक पर न्यूज़ बनते हैं।  नाम हैं  अविनोद चक्रवाती 

लेखक 

इज़हार आलम 

writerdelhiwala 


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